ये इश्क़ वो है जिस ने बहर-ओ-बर ख़राब कर दिया
हमें तो उस ने जैसे ख़ास कर ख़राब कर दिया
मैं दिल पे हाथ रख के तुझ को शहर भेज दूँ मगर
तुझे भी उन हवाओं ने अगर ख़राब कर दिया
किसी ने नाम लिख के और किसी ने पींग डाल के
मोहब्बतों की आड़ में शजर ख़राब कर दिया
तुम्हें ही देखने में महव है वो काम छोड़कर
तुम्हारी कार ने तो कारीगर ख़राब कर दिया
मैं क़ाफ़िले के साथ हूँ मगर मुझे ये ख़ौफ़ है
अगर किसी ने मेरा हम सफ़र ख़राब कर दिया
तेरी नज़र के मैक़दे तमाम शब खुले रहे
तेरी शराब ने मेरा जिगर ख़राब कर दिया
— Tehzeeb Hafi















