कदम रखता है जब रास्तों पे यार आहिस्ता आहिस्ता
तो छट जाता है सब गर्द-ओ-ग़ुबार आहिस्ता आहिस्ता
भरी आँखों से होकर दिल में जाना सैन थोड़े ही है
चढ़े दरियाओं को करते हैं पार आहिस्ता आहिस्ता
नज़र आता है तो यूँ देखता जाता हूँ मैं उस को
की चल पड़ता है कारोबार आहिस्ता आहिस्ता
तेरा पैकर ख़ुदा ने भी फ़ुर्सत में बनाया था
बनाएगा तेरे जेवर सुनार आहिस्ता आहिस्ता
वो कहता है हमारे पास आओ पर सलीक़े से
के जैसे आगे बढ़ती है कतार आहिस्ता आहिस्ता
इधर कुछ औरतें दरवाज़े पर दौड़ी हुई आई
उधर घोड़ों से उतरे शहसवार आहिस्ता आहिस्ता
— Tehzeeb Hafi















