उस की आँखों में मोहब्बत की चमक आज भी है
उस को हालाँकि मेरे प्यार पे शक आज भी है
नाव में बैठ के धोए थे कभी हाथ उस ने
सारे तालाब में मेहँदी की महक आज भी है
मेरी इक शर्ट में कल उस ने बटन टाँका था
शहर के शोर में चूड़ी की खनक आज भी है
उसे खो कर भी न खोने की ख़ुशी अब न रही
उसे पा कर भी न पाने की कसक आज भी है
ज़ख़्म सब सूख गए हैं मेरे मरहम के बिना
मेरे इक दोस्त की मुट्ठी में नमक आज भी है
— Tanveer Ghazi















