सब दे रहे हैं दिल मुझे अपना निकाल के
दर-अस्ल मैं ने शे'र कहे हैं कमाल के
अब आप सोच लीजिए मजबूरियाँ मेरी
हिज्र-ओ-विसाल तय करूँ सिक्का उछाल के
हर रोज़ मैं उरूज की चढ़ता हूँ सीढ़ियाँ
क़िस्से मगर सुनाऊँ हमेशा ज़वाल के
वो चाय हो या खीर हो या इश्क़ हो 'तनोज'
लज़्ज़त बढ़ेगी और ज़ियादा उबाल के
— Tanoj Dadhich















