सभी कहते बहुत अच्छा अगर तुम शा'इरी करती

ज़माना क्या ख़ुदा सुनता अगर तुम शा'इरी करती

तुम्हारी बात करने की अदा ने ही किया पागल
न जाने हाल क्या होता अगर तुम शा'इरी करती

मुनव्वर और राहत फिर तुम्हें भी तो पसंद आते
सुनाती जौन का मतला अगर तुम शा'इरी करती

नियम कानून भी तुम को बहुत सी छूट देते फिर
नहीं लगता कोई नुक़्ता अगर तुम शा'इरी करती

— Tanoj Dadhich

More by Tanoj Dadhich

Other ghazal from the same pen

See all from Tanoj Dadhich →

Khuda Shayari

Shers of khuda.

All Khuda Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling