खाना खाकर पैदल उतना चलता था
जितने घंटे कॉल हमारा चलता था
आगे पीछे अब तो जुमले चलते हैं
क्या दिन थे जब शे'र अकेला चलता था
आज उन्हीं से नोट नहीं लेता कोई
कल तक जिन का खोटा सिक्का चलता था
बारह दिन में ख़त्म नहीं होता था दुख
कोई मरे तो बरसों रोना चलता था
दूर खड़े राजा रानी डर जाते थे
ढाई क़दम जब मेरा घोड़ा चलता था
— Tanoj Dadhich















