उस को ज़िदस तो अच्छा नहीं रोकना छोड़ दो
उस की मर्ज़ी है तुम उस पे ये फ़ैसला छोड़ दो
मैं ने बस इतना पूछा था क्या देखते हो भला
मैं ने ये कब कहा था मुझे देखना छोड़ दो
तुम मिलोगे नहीं तो मैं जीते जी मर जाऊँगी
बा-ख़ुदा ऐसी ख़ुशफ़हमियाँ पालना छोड़ दो
मेरी आँखों पे पट्टी बँधी है बँधी रहने दो
उस के बारे में तुम भी बुरा सोचना छोड़ दो
गीली मिट्टी की ख़ुशबू मुझे सोने देती नहीं
मेरे बालों में तुम उँगलियाँ फेरना छोड़ दो
— Tajdeed Qaiser















