हम ने तस्वीर जो बना ली है
कुछ हक़ीक़त है कुछ ख़याली है
तुम उधर सुब्ह घर से निकले थे
और इधर शाम होने वाली है
देखते देखते मुझे उस ने
चाय टी-शर्ट पर गिरा ली है
ढूँढती हैं तुझे मेरी आँखें
और धड़कन तेरी सवाली है
— Tajdeed Qaiser
कुछ हक़ीक़त है कुछ ख़याली है
तुम उधर सुब्ह घर से निकले थे
और इधर शाम होने वाली है
देखते देखते मुझे उस ने
चाय टी-शर्ट पर गिरा ली है
ढूँढती हैं तुझे मेरी आँखें
और धड़कन तेरी सवाली है
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