हमारी छोटी सी एक ख़्वाहिश क़ुबूल कर ले
फिर उस के बदले में जो भी चाहे वसूल कर ले
जिसे भी चाहे बिठाए सर पे घुमाए दुनिया
जिसे भी चाहे तू अपने पैरों की धूल कर ले
वहाँ तू ख़्वाहिश की बारगाह में झुका हुआ था
यहाँ मुहब्बत के ज़ाविए को असूल कर ले
अभी तुझे दीन दुनियादारी कहाँ पता है
अभी तो कुछ भी नहीं गया कोई भूल कर ले
— Tajdeed Qaiser















