तेरी चाहत में मर के देखूँगा
काम ये भी मैं कर के देखूँगा
छीन सकता है कौन मुझ से तुझे
जाँ हथेली पे धर के देखूँगा
ग़ैर मुमकिन है चाँद को लाना
फिर भी कोशिश मैं कर के देखूँगा
तेरी आँखों में ख़ुद को पाऊँगा
रुख़ पे तेरे सँवर के देखूँगा
रख के आँखों में हिज्र को तेरे
फिर तसव्वुर में डर के देखूँगा
बन के 'ताहिर' मैं प्यार की ख़ुशबू
गिर्द तेरे बिखर के देखूँगा
— Tahir Adeem















