उदासी से सजे रहिए
कोई रुत हो हरे रहिए
पड़े रहना भी अच्छा है
मुहब्बत में पड़े रहिए
रज़ाई खींचिए सर तक
सहर को टालते रहिए
वो ऐसे होंट हैं के बस
हमेशा चूमते रहिए
— Swapnil Tiwari
कोई रुत हो हरे रहिए
पड़े रहना भी अच्छा है
मुहब्बत में पड़े रहिए
रज़ाई खींचिए सर तक
सहर को टालते रहिए
वो ऐसे होंट हैं के बस
हमेशा चूमते रहिए
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