मोहब्बत जंग है ये जंग जारी है
न जाने क्यूँ तबीयत आज भारी है
किसी ने जैसे केशों को सँवारा हो
तभी तो आज मौसम में ख़ुमारी है
इन्हें पागल नहीं बतला ओ चारा-गर
यहाँ सब को मोहब्बत की बीमारी है
किसी दिन 'सूर्य' तुम भी हार जाओगे
यही इक जंग कृष्णा ने भी हारी है
— Surya Tiwari















