अब के चेहरे पे वो दरार आई
आईना बन गया तमाशाई
अपना दिल जैसे दुखती आँख कोई
उस की यादें कि जैसे पुरवाई
एक मुद्दत के बा'द हम ने 'असद'
उस को देखा तो अपनी याद आई
— Subhan Asad
आईना बन गया तमाशाई
अपना दिल जैसे दुखती आँख कोई
उस की यादें कि जैसे पुरवाई
एक मुद्दत के बा'द हम ने 'असद'
उस को देखा तो अपनी याद आई
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