ऐसी शदीद रौशनी मैं जल मरूँगा मैं
इतने हसीं शख़्स को कैसे सहूँगा मैं
मुझ से मेरा वजूद तो साबित नहीं हुआ
तू आँख भर के देख ले होने लगूँगा मैं
मैं मरकज़े से दूर हूँ पर दायरे मैं हूँ
ज़िंदा रहा तो तेरे गले आ लगूँगा मैं
मैं वो अजीब शख़्स हूँ के चंद रोज़ तक
पागल न कर सका तो उसे मार दूँगा मैं
— Sohaib Mugheera Siddiqi















