फूल महके है जब हो साथ ज़मीं
फिर मिले हम महक रही वो नहीं
राह तकते हैं लोग कितने बरस
फिर ख़ुदा से ये रूठते हैं कहीं
ये मुलाक़ात आख़री समझो
फिर कहो देर तक तकूँ कि नहीं
मुझ में अच्छा न कुछ बचा यारों
फिर भी आई नज़र न तुम को कमीं
— Shubham Nankani
फिर मिले हम महक रही वो नहीं
राह तकते हैं लोग कितने बरस
फिर ख़ुदा से ये रूठते हैं कहीं
ये मुलाक़ात आख़री समझो
फिर कहो देर तक तकूँ कि नहीं
मुझ में अच्छा न कुछ बचा यारों
फिर भी आई नज़र न तुम को कमीं
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