मैं अधूरे गीत दी इक सतर हाँ

मैं अपैरी-पैड़ दा इक सफ़र हाँ

इश्क़ ने जो कीतीआं बरबादीआं
मैं उहना बरबादीआं दी सिखर हाँ

मैं तेरी महफ़िल दा बुझिआ इक चराग़
मैं तेरे होठां चों किरिआ ज़िकर हाँ

इक कल्ली मौत है जिसदा इलाज
चार दिन दी ज़िंदगी दी फ़िकर हाँ

जिस ने मैनूं वेख के न वेखिआ
मैं उहदे नैणां दी गुंगी नज़र हाँ

मैं तां बस आपणा ही चिहरा वेखिए
मैं वी इस दुनियां च कैसा बशर हाँ

कल किसे सुणिआ है शिव नूं कंहदिआं
पीड़ लई होइआ जहाँ विच नशर हाँ

— Shiv Kumar Batalvi

Nigaah Shayari

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