इस तरह के हरीफ़-ए-सख़्त के साथ
कौन लड़ता है अपने बख़्त के साथ
देखिए क्या हमें गवारा हो
एक तख़्ता धरा है तख़्त के साथ
वो ज़रूरत थी या मुहब्बत थी
बेल लिपटी रही दरख़्त के साथ
— Shaukat Fehmi
कौन लड़ता है अपने बख़्त के साथ
देखिए क्या हमें गवारा हो
एक तख़्ता धरा है तख़्त के साथ
वो ज़रूरत थी या मुहब्बत थी
बेल लिपटी रही दरख़्त के साथ
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