जो देखता हूँ वही बोलने का 'आदी हूँ

मैं अपने शहर का सब से बड़ा फ़सादी हूँ

सहल है सज्दा हुक़ूक़-उल-इ'बा'द मुश्किल-तर
इसी लिए तो मैं आबिद नहीं इबादी हूँ

मेरे बग़ैर तेरी ज़िंदगी अधूरी सी
मैं हर लिहाज़ से तेरे लिए इफ़ादी हूँ

बहुत से नाम हैं मुझ में लहू से लिक्खे हुए
मैं दोस्ती का नहीं दुश्मनी का 'आदी हूँ

सियासियात के माहिर मुझे समझते हैं
मैं सरहदों के लिए जंग की मुनादी हूँ

मुझे मज़ाक़ का पहलू बनाया जाता है
'शकील शाह' मैं ग़ुर्बत-ज़दा की शादी हूँ

— Shakeel Shah

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