बे-झिझक आ गए बे-ख़बर आ गए
आज रिन्दों में वाइज़ किधर आ गए
गुफ़्तगू उन से होती ये किस्मत कहाँ
ये भी उन का करम है नज़र आ गए
आना जाना भी ये ख़ूब है आप का
बे-कहे चल दिए बे-ख़बर आ गए
हम तो रोते ही थे इश्क़ में रात दिन
तुम भी आख़िर इसी राह पर आ गए
— Shakeel Badayuni















