इतने गहरे काले गेसू
कितने प्यारे प्यारे गेसू
उस की तो किस्मत सँवरेगी
जो भी तिरा सँवारे गेसू
सब को तेरी आँखें मारे
हम को तो बस मारे गेसू
चेहरा जैसे चाँद का टुकड़ा
इनको और निखारे गेसू
कितनी सुंदर लगती तुम पर
घुँघराले-घुँघराले गेसू
बिल्कुल तुझ सेा रखने वाला
मैं भी अपने सारे गेसू
खु़द ही खु़द में निखरा जाए
'शगफ़' तिरा जो निहारे गेसू
— Adnan Ali SHAGAF















