कभी हम अपने दिल को इस तरह भी शाद करते हैं

किसी पंछी को तेरे नाम से आज़ाद करते हैं

उदासी में ख़ुशी को इस तरह आबाद करते हैं
हँसाकर एक बच्चे को तुझे हम याद करते हैं

समझने और सुनने वाले मिलते ही कहाँ है अब
यहाँ मौजूद हैं तो हम भी कुछ इरशाद करते हैं

मेरा रब मुझ से राज़ी है तो बस उस का शबब ये है
इबादत पहले सारे काम उस के बा'द करते हैं

कभी तुझ से मिलेंगे तो कहेंगे झूठ तुझ से हम
न तेरी फ़िक्र करते हैं न तुझ को याद करते हैं

— Sapna Moolchandani

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