कभी दुश्मनों से लड़ाई नहीं की
कभी दोस्तों की बुराई नहीं की
मुहब्बत में ज़ख़्मी हुए दिल की ख़ातिर
दुआएँ की हम ने दवाई नहीं की
हमें क्या पता कैसे जीते हैं वो लोग
कभी हम ने तो बेवफ़ाई नहीं की
मुख़ालिफ़ हमें जानते ही नहीं थे
सो हासिद रहे आशनाई नहीं की
वो मुफ़लिस था मुफ़लिस है मुफ़लिस रहेगा
मुहब्बत की जिस ने कमाई नहीं की
— Sapna Moolchandani















