महाज़-ए-जंग में लश्कर का दस्ता टूट जाता है
मुसल्लह सामने हो तो निहत्था टूट जाता है
सफ़र की मुश्किलों से बस मुसाफ़िर ही रहे वाकिफ़
बदन और हौसले के साथ क्या क्या टूट जाता है
तअल्लुक़ को तहम्मुल से निभाना है बहुत लाज़िम
ज़रा सी भूल से मज़बूत रिश्ता टूट जाता है
मिसाल ए ज़िंदगी जीना सलीक़े मंद ही जाने
कि बेतरतीब होने से क़रीना टूट जाता है
सरापा ढाँप लेना ही फ़क़त काफी नहीं होता
कोई आवाज़ भी सुन ले तो पर्दा टूट जाता है
मुसलसल आज़माइश में घिरे रहने से लोगों का
दु'आओं हिकमतों पर से अक़ीदा टूट जाता है
समुंदर के बवंडर से 'सना' मोहतात ही रहना
किनारे तक पहुंचने में सफ़ीना टूट जाता है















