उन सेे जब भी आँख मिलाने लगते हैं

फिर तो अपने होश ठिकाने लगते हैं

उन की अदाओं की हम क्या ता'रीफ़ करें
उन के हर अंदाज सुहाने लगते हैं

उन का तसव्वुर में चेहरा आ जाता है
उन पर हम भी शे'र सुनाने लगते हैं

उन से मिल कर ऐसा भी होता है 'समीर'
वो भी हम को ख़ूब सताने लगते हैं

— Sameer Khan

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