तस्बीह हराम तेरी मुसल्ला हराम है
ख़ल्वत में नाम यार का लेना हराम है
ख़त्तात शब-ए-वस्ल की पहली ये शर्त है
मज़मून दिख न पाए, लिफ़ाफ़ा हराम है
मेरे अलावा कमरे में कोई नहीं बचा
सीने पे आप के ये दुपट्टा हराम है
मैं पाँव चूम लूँ जो रिआयत मिले सनम
लेकिन मेरे यहाँ पे तो सजदा हराम है
नादानियों का रद्द-ए-अमल है अलहदगी
उल्फ़त में राय ग़ैर कि लेना हराम है
दासी उतार फेंक ये चोला कि शब ढले
जोगी को इंतिज़ार कराना हराम है
सुंडी के जैसे रेंग रहा हूँ गुलाब पर
ज़िंदान है नसीब, ज़ुलैख़ा हराम है।
— Safar















