किताबें शहर से जंगल से फूल ला के दो
हमारे कमरे के दीवार-ओ-दर सजा के दो
हमारे ख़्वाब में तुम भी हो और गुलाब भी हैं
हमारे ख़्वाब में इक आइना लगा के दो
ये मोच आई मुझे आसमाँ से गिरने पर
किसी ने मुझ से कहा था कि चाँद ला के दो
मुझे भी शीश महल देखने की ख़्वाहिश है
मुझे उस आँख तलक रास्ता बना के दो
— Ruqayyah Maalik















