मुफ़लिस की बद-दुआ हूँ मुझे मार दीजिए

मैं आप इक बला हूँ मुझे मार दीजिए

उस से बिछड़ के उस की मुहब्बत की आग में
मुद्दत से जल रहा हूँ मुझे मार दीजिए

हासिल मुझे करेंगे तो तड़पेंगे उम्र भर
मैं दर्द-ए-ला-दवा हूँ मुझे मार दीजिए

क्या कुछ न कर चुका हूँ मैं जीने के वास्ते
पर अब मैं थक चुका हूँ मुझे मार दीजिए

ख़ुद अपनी जान लूँगा तो दोज़ख में जाऊँगा
मैं ख़ुल्द चाहता हूँ मुझे मार दीजिए

परवाज़ कर न पाएँगे सोहबत में मेरी आप
मैं ऐब देखता हूँ मुझे मार दीजिए

हर पैदा होने वाले को लाज़िम है इंतिक़ाल
इस हक़ से बोलता हूँ मुझे मार दीजिए

— रूपम कुमार 'मीत'

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