चाँद-सा अपना मुखड़ा दिखा दीजिए
रुख़ से पर्दा ज़रा-सा हटा दीजिए
मेरी चाहत पे बेहद खफ़ा हैं मगर
मेरे जज़्बों का कुछ तो सिला दीजिए
ले के उम्मीद आया हूँ दर आप के
जाम-ए-वहदत नज़र से पिला दीजिए
फ़र्क ज़र्रा बराबर न रह पाए अब
फ़ासला आज हर इक मिटा दीजिए
ज़िंदगी भर दिलों में महकते रहें
प्यार के फूल ‘रोहित’ खिला दीजिए
— Rohit Asthana Prabhav















