ये जो चेहरे की ख़ुश-लिबासी है
जश्न के बा'द की उदासी है
मुद्दतों दूर कर के छोड़ेगी
बात कहने को बस ज़रा सी
दोस्तो, बस क़ुबूल कर लेना
ख़्वाब ताज़ा हैं आँख बासी है
— Renu Nayyar
जश्न के बा'द की उदासी है
मुद्दतों दूर कर के छोड़ेगी
बात कहने को बस ज़रा सी
दोस्तो, बस क़ुबूल कर लेना
ख़्वाब ताज़ा हैं आँख बासी है
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