मुझ को डोली में बिठा डर के हवाले कर दे

मेरी माँ मुझ को मुक़द्दर के हवाले कर दे

अब ये एहसास कि दुनिया में कोई मेरा नहीं
जाने कब मुझ को समुंदर के हवाले कर दे

उस क़बीले से नहीं मैं कि जो अपनी लड़की
जंग के ख़ौफ़ से लश्कर के हवाले कर दे

घूमने फिरने का हक़ रखती है फिर भी तितली
किस लिए ख़ुद को गुल-ए-तर के हवाले कर दे

ख़ाली कमरे में पड़े रहने से बेहतर होगा
ऐ 'क़मर' ख़ुद को भरे घर के हवाले कर दे

— Rehana Qamar

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