वो जिस ने पास में हुश्न ओ जमाल रक्खा है
उसी ने सब को ही चक्कर में डाल रक्खा है
वो आबसार के जैसा बहेगा आँखों से
जो क़तरा आँख में हम ने सँभाल रक्खा है
इसे अकेले में पलकों से चूम के पढ़ना
कि ख़त में हम ने कलेजा निकाल रक्खा है
ये मसअला तो किसी हाल हल नहीं होगा
जवाब में जो ये तुम ने सवाल रक्खा है
कढ़ाई कर के मेरा नाम जिस पे लिक्खा था
वही रुमाल अभी तक सँभाल रक्खा है
मुझे तो मार ही डाले "मलक" ये तन्हाई
तुम्हारी याद ने मेरा ख़याल रक्खा है
— Ram Singar Malak















