दिए बुझे हैं मगर दूर तक उजाला है
ये आप आए हैं या दिन निकलने वाला है
ख़याल में भी तेरा अक़्स देखने के बा'द
जो शख़्स होश गँवा दे वो दोश वाला है
जवाब देने के अन्दाज़ भी निराले हैं
सलाम करने का अन्दाज़ भी निराला है
सुनहरी धूप है सदक़ा तेरे तबस्सुम का
ये चाँदनी तेरी परछाईं का उजाला है
है तेरे पैरों की आहट ज़मीन की गर्दिश
ये आ
समाँ तेरी अँगड़ाई का हवाला है
— Rahat Indori















