तेरी गोदी में पहली बार जब आया बहुत रोया

जुदा होकर तेरी गोदी से मैं पापा बहुत रोया

फ़ना कर के शजर सारे मैं इतराया अमीरी पे
जो आई साँस पे आफ़त पकड़ माथा बहुत रोया

क़दीमी पाप नदियों में बहा फिर पाप करते हैं
ठगी ये देख कर बेबस हुआ दरिया बहुत रोया

ख़िताबें ख़ूब हासिल की दुशाला वाह-वाही भी
रिज़र्वेशन ने जब मारा भरम टूटा बहुत रोया

हुआ मुश्किल मिलाना काफ़िया तुम से मुहब्बत में
मगर तुक तोड़ कर तुम से नयन मेरा बहुत रोया

— Ragini Preet

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