कहीं बैठ कर गीत गा लूँ
तुझे ज़िंदगी गुनगुना लूँ
अगर तू ख़फ़ा है बता दे
गले से लगा कर मना लूँ
ज़रा देर को तू ठहर जा
मैं तस्वीर तेरी बना लूँ
तू धड़कन में मुझ को बसा ले
मैं आँखों में सपने सजा लूँ
तू मेरे तसव्वुर में आ जा
मैं ख़ुशबू से तेरी नहा लूँ
तू मुझ से बिछड़ने को सोचे
मैं मिलने का रस्ता निकालूँ
— Raghvendra dwivedi















