ख़ुद अपनी ज़िल्लत-ओ-ख़्वारी न करना
किसी कम-ज़र्फ़ से यारी न करना
अगर तुम शाद रहना चाहते हो
किसी की भी दिल-आज़ारी न करना
अगर तौफ़ीक़ हो सच बोलने की
तो अपनी भी तरफ़-दारी न करना
तुम्हें हम जानते पहचानते हैं
कभी हम से अदाकारी न करना
किसी के साथ कर लेना इबादत
हर इक के साथ मय-ख़्वारी न करना
न गिर जाना 'रईस' अपनी नज़र से
कभी तौहीन-ए-ख़ुद्दारी न करना
— Raees Rampuri















