कम मुयस्सर हो जो होती है उसी की क़ीमत

कसरत-ए-ग़म ने बढ़ाई है ख़ुशी की क़ीमत

पैरवी-ए-दिल-ए-नादाँ का सलीक़ा है जिन्हें
उन से पूछे कोई बे-राह-रवी की क़ीमत

तुम ने हँसते मुझे देखा है तुम्हें क्या मालूम
करनी पड़ती है अदा कितनी हँसी की क़ीमत

एहतिराम अपना ही ख़ुद जिस की निगाहों में न हो
क्या भला उस की निगाहों में किसी की क़ीमत

मुझ से धोका तो हुआ दिल को मगर मौज-ए-सराब
मिल गई मुझ को मिरी तिश्ना-लबी की क़ीमत

मेरे सीने में छुपे ज़ख़्म बताएँगे 'रईस'
मैं ने जो की है अदा ज़िंदा-दिली की क़ीमत

— Raees Rampuri

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Nazakat Shayari

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