वक़्त को ज़िंदगी की ज़रूरत नहीं

और तो चाहिए अब नसीहत नहीं

मानते हम कि हालात की बात है
बेवजह सी हमारी ये फ़ुर्क़त नहीं

तुम ने मसरूफ़ियत का बहाना किया
रू-ब-रू हम से होने की फ़ुर्सत नहीं

मंज़िलों का जो तुम रास्ता बन गए
अब किसी और की हम को हसरत नहीं

'प्रीत' को तुम कहाँ ले के आए सनम
चाहतों के लिए यूँ फ़ज़ीहत नहीं

— Harpreet Kaur

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