न बुलाओ मुझे ख़ुदा की तरफ़
मैं उसी की हूँ बंदगी में लगी
जिस में थी जंगलों की बे-नज़मी
वो नुमाइश भी शहर ही में लगी
रात मैं ने पढ़ी जो धूप की नज़्म
बे-मज़ा उन को चाँदनी में लगी
जाम-ए-सुक़रात क्या पिया मैं ने
प्यास मुझ को न ज़िंदगी में लगी
और कुछ काम भी करूँ 'परवीन'
तुम तो हो सिर्फ़ शाइ'री में लगी
— Parveen Kaif















