बंध जाएँ सामान तनाबें खुल जाएँ
काश ख़ुदा पर मेरी दुआएँ खुल जाएँ
मैं तो बस इस की ही ख़ुशी में जी लूँगा
गर मेरे ईसा की साँसें खुल जाएँ
सुब्ह हुई है लेकिन अभी अँधेरा है
इतना मत जागो की ये आँखें खुल जाएँ
चंद लकीरें लिख पाएँ कितनी तहरीर
एक जबीं पर कितनी शिकनें खुल जाएँ
उस के वस्ल से पहले मौत न आए और
ला-फ़ानी होने की राहें खुल जाएँ
— Pallav Mishra















