इक तवाज़ुन को बिगाड़ा नहीं जा सकता है
घर किसी का हो उजाड़ा नहीं जा सकता है
और गाड़ी कोई उस के लिए लानी होगी
कार में इतना कबाड़ा नहीं जा सकता है
जो सज़ा उस की हो दे दीजिए उस को इक दिन
रोज़ मुजरिम को लताड़ा नहीं जा सकता है
कल ये कानून भी आ सकता है शे'रों के लिए
बे-इजाज़त के दहाड़ा नहीं जा सकता है
दौर-ए-मजनूँ की मोहब्बत में सुहूलत थी बहुत
अब गिरेबान को फाड़ा नहीं जा सकता है
गर्म जज़्बात की आँच और है दरकार ओवैद
इतनी गर्मी से तो जाड़ा नहीं जा सकता है
— Obaid Azam Azmi















