कोई हंगामा उठाया जाए
बे-सबब शोर मचाया जाए
किस के आँगन में नहीं दीवारें
किस को जंगल में बुलाया जाए
उस से दो-चार बार और मिलें
जिस को दिल से न भुलाया जाए
मर गया साँप नदी ख़ुश्क हुई
रेत का ढेर उठाया जाए
— Nida Fazli
बे-सबब शोर मचाया जाए
किस के आँगन में नहीं दीवारें
किस को जंगल में बुलाया जाए
उस से दो-चार बार और मिलें
जिस को दिल से न भुलाया जाए
मर गया साँप नदी ख़ुश्क हुई
रेत का ढेर उठाया जाए
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