ख़ुदा से बोल देना याद कर के

वो बूढ़ा मर गया फ़रियाद कर के

ये पक्षी और कोई बाँध लेगा
इसे क्या फ़ाइदा आज़ाद कर के

गुज़रते साल से ये पूछना था
वो ख़ुश तो है हमें बर्बाद कर के

ख़ुदा कुछ वक़्त मेरी मौत टालो
मुझे मरना है सब को शाद कर के

ये पिछला साल था क़ातिल, तो डर है
नया मारे न फिर बेदाद कर के

— Naved sahil

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