बोले तो अच्छा बुरा महसूस हो

उस की ख़ामोशी से क्या महसूस हो

इस तरह दीवार पर तस्वीर रख
आदमी बैठा हुआ महसूस हो

दाम मुँह माँगे मिलेंगे और नक़्द
क़त्ल लेकिन हादसा महसूस हो

रख लिया अख़बार पैसों की जगह
ताकि बटुआ कुछ भरा महसूस हो

देखना चाहूँ उसे तो हर कोई
मेरी जानिब' देखता महसूस हो

पास जाने पर खुले प्यासे पे रेत
दूर से पानी खड़ा महसूस हो

— Nadir Ariz

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