बर्फ़ बेकार में पिघल गई है
उस मुहब्बत की उम्र ढल गई है
पहली पहली अज़ान मुश्किल थी
तुम ने देखा फ़िज़ा बदल गई है
उस का घर देखने के चक्कर में
मेरे गाँव की बस निकल गई है
हादसा हाथ मल रहा होगा
कार उलटती हुई सम्भल गई है
— Nadir Ariz
उस मुहब्बत की उम्र ढल गई है
पहली पहली अज़ान मुश्किल थी
तुम ने देखा फ़िज़ा बदल गई है
उस का घर देखने के चक्कर में
मेरे गाँव की बस निकल गई है
हादसा हाथ मल रहा होगा
कार उलटती हुई सम्भल गई है
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