माँगते माँगते दुआ मिरे साथ

बुझ गया आख़िरी दिया मिरे साथ

तू ने मुझ को तसल्ली देना थी
तू भी ऐ शख़्स रो पड़ा मिरे साथ

दिल में आया ख़याल तुझ से मिलूँ
चल पड़ा एक रास्ता मिरे साथ

कोई जचता नहीं अलावा तिरे
वर्ना इक हम-सफ़र तो था मिरे साथ

बद-नसीबी कि इश्क़ कर के भी
कोई धोका नहीं हुआ मिरे साथ

दुश्मनी तो मिरी थी सूरज से
शहर का शहर जल गया मिरे साथ

सारे चेहरे ही तेरे चेहरे हैं
तू रहा है जुदा जुदा मिरे साथ

— Nadeem Bhabha

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Rahbar Shayari

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