दिखा रहा हूँ तमाशा समझ में आ जाए

कि एक बार उसे दुनिया समझ में आ जाए

ये लोग जा तो रहे हैं नए ज़माने में
दुआ करो इन्हें रस्ता समझ में आ जाए

ग़लत न जान कि आँखें नहीं रहीं मेरी
सो छू रहा हूँ कि चेहरा समझ में आ जाए

ख़ुदा करे तुझे तहज़ीब-ए-मय-कशी हो नसीब
ख़ुदा करे तुझे नश्शा समझ में आ जाए

ये लोग जंग की बातें नहीं करेंगे अगर
गली में खेलता बच्चा समझ में आ जाए

हम उस को अपना समझते हैं अपना मानते हैं
जिसे हमारा इलाक़ा समझ में आ जाए

'नदीम' दूसरा उन को दिखाई देता नहीं
'नदीम' जिन को भी पहला समझ में आ जाए

— Nadeem Bhabha

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