
बस एक मैं था जिस सेे सच मुच में दिलबरी की
वरना हर आदमी से उस ने दो नंबरी की
जिस बात में भी हम ने ख़ुद को अकेला रक्खा
बाग़ात में भी हम ने जोड़ों की मुख़बरी की
— Muzdum Khan
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