निकला ज़बाँ से 'मरहबा' यारों से जबकि ये कहा

रहिए मुल्के अदम हुआ हिंद का नवजवां भगत

ख़ुशियाँ मनाओ हिंदियों रंजो अलम फ़ना करो
क्या ख़ुश नसीब मुल्क है, जिस
में था नवजवां भगत

हिंद के ऐ बहादुरों, कुछ भी रंजोग़म करो
दुनिया से मर गया भगत, होवेंगे बे-करा भगत

यूँ तो भगत बहुत हुए, माला लिए जपा किए
आए नज़र न देशभक्त, जैसे था नवजवां भगत

हिंद के ऐ निवासियों, इतना हमें जवाब दो
लोगे न क्या स्वराज तुम फांसी चढ़ा जवां भगत

दागो जुदाई सिंह के, सद
में उठा न ऐ अली
ख़ाके वतन के ज़र्रे से पैदा हैं ये करां भगत

— Mushtaq Ali Khan

Kismat Shayari

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