मैं कबूतरों को उड़ाता हूँ और देखता हूँ
फ़ज़ा का हुस्न बढ़ाता हूँ और देखता हूँ
ये आँख मुफ़्त में कुछ भी नहीं दिखाती मुझे
मैं इस को ख़्वाब दिखाता हूँ और देखता हूँ
सुनाई देता है किस किस को कौन सुनता है
गली में शोर मचाता हूँ और देखता हूँ
कभी मैं पूछता रहता था कौन है दर पर
और अब मैं दौड़ के जाता हूँ और देखता हूँ
धमाल डालने आता है रोज़ एक मलंग
मैं रोज़ देखने जाता हूँ और देखता हूँ
सुना है मौत मुदावा है ज़ीस्त के ग़म का
रुको मैं जान से जाता हूँ और देखता हूँ
हया से कैसे बदलती है रंगत-ए-रुख़्सार
मैं उस को शे'र सुनाता हूँ और देखता हूँ
कशिश ज़मीन में ज़्यादा है आसमान में कम
हवा में ख़ाक उड़ाता हूँ और देखता हूँ
जो शख़्स प्यार का मुनकिर है सामने आए
मैं उस से आँख मिलाता हूँ और देखता हूँ















