Subah Shayari
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Subah Shayari

    सभी के दीप सुंदर हैं हमारे क्या तुम्हारे क्या
    उजाला हर तरफ़ है इस किनारे उस किनारे क्या

    Hafeez Banarasi
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    हर इक मकाँ में जला फिर दिया दिवाली का
    हर इक तरफ़ को उजाला हुआ दिवाली का

    Nazeer Akbarabadi
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    अँधेरा खो गया है गाँव वालों
    सवेरा हो गया है गाँव वालों

    तुम्हे अब जागना ख़ुद ही पड़ेगा
    ये मुर्गा सो गया है गाँव वालों

    Divy Kamaldhwaj
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    लोरियाँ माँ ने सुनाई और फिर
    मेरे सपनों में उजाला हो गया

    Saarthi Baidyanath
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    सुबह से शाम तक है बेक़रारी सी
    तिरी यादें नहीं देती खुशी के पल

    Meem Alif Shaz
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    दो दफ़ा ग़ुस्सा हुए वो एक ग़लती पर मेरी
    रात की रोटी सवेरे काम में लाई गई

    Tanoj Dadhich
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    रात की बात तो और कुछ थी मगर
    ये सवेरे सवेरे अँधेरा घना

    Sumit Panchal
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    आज फिर झूठी तसल्ली के लिए
    सुबह में अख़बार मैंने पढ़ लिया

    Nirmal Neer
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    ज़मीं पर आगया सूरज या के दिल है
    ये क्या जलता है ये कैसे उजाले हैं

    Raza sahil
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    गज़ब हिम्मत सुबह माँ से विदा बेटी हुई होगी
    बिछुड़ना माँ अभी उससे महज सपना समझती है

    सितम गर ये मुझे झूठा कहा तुमने कयामत है
    कसम खाकर कहूँ तो माँ अभी सच्चा समझती है

    Rudransh Trigunayat
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    तेरे होंटों से छलकती है किरन सूरज की
    तेरे हंसने से मेरी सुबह चमक उठती है

    Nirmal Nadeem
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    सवेरे से ले बैठा हूँ गुलाल अपने मैं हाथों में
    न ये बेरंग हो जाए तुम अपना गाल इधर कर दो

    SHIV SAFAR
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    हर सुबह उठ के इसको मैं हूँ चूमता
    चाय है जैसे ये कोई सौतन तेरी

    RAJAT AWASTHI
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    ये दिल है तेरा या मेरा ख़्याल कुछ भी नहीं
    ये शाम है या सवेरा ख़्याल कुछ भी नहीं

    याँ इक मैं हूँ जिसको तेरा ही है ख़्याल फ़क़त
    वाँ इक तू है जिसको मेरा ख़्याल कुछ भी नहीं

    Deep kamal panecha
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    सारे अधूरे हैं तिरे इक हुस्न के वो सामने
    तू जो दिखे तो रात में भी भोर हो जाए मिरा

    Ganesh gorakhpuri
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    हम टूट गए यूँ तो उम्मीद रही लेकिन
    इस रात अँधेरी को इक भोर से मिलना है

    Avinash bharti
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    तीरगी से रौशनी में जाना है
    आँख खुलते ही सवेरा आना है

    Shivang Tiwari
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    एक ही बात से वो ख़फ़ा हो गई
    इसलिए अपनी साँसें सज़ा हो गई

    रात भर उस के हाथों पे मेहँदी रचाई
    सुबह आई तो हम से जुदा हो गई

    Meem Alif Shaz
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    ज़िंदगी से ज़िंदगी जब रूठ जाएगी सनम
    ख़्वाब पाने के मुझे तुम देखना फिर सौ जनम

    रात को हँसते मिलोगे नींद में बेफ़िक्र तुम
    और उठते ही सवेरे फिर करोगे आँख नम

    Rubball
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    मिरे अंदाज़ ज़माने से निराले होंगे
    आज अँधेरे हैं तो क्या कल को उजाले होंगे

    एक रोटी में सुनाते हैं तुझे कितना कुछ
    कल से होंटों पे तिरे मेरे निवाले होंगे

    कम से कम सैकड़ों को भूख ने मारा होगा
    बच गए जितने सभी दर्द ने पाले होंगे

    अब हमें मौत भी मक़बूल नहीं करती है
    ज़िंदगी तू ही बता किसके हवाले होंगे

    हर दफ़ा छीन लिया मेरा निवाला सबने
    फिर तो बच्चे भी तिरे भूख ने पाले होंगे

    अरे कमरे में मिरे कुछ भी नहीं है सच्ची
    चार दीवार मिलेंगी बचे जाले होंगे

    शहर-ए-दिल में सुनो तो कोई नहीं रहता है
    तुम कहाँ जा रहे हो सब में ही ताले होंगे

    छोड़ के ख़ुद को ज़माने को दिया है मरहम
    फिर तो बेशक ही तिरे पाँव में छाले होंगे

    Prashant Kumar
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